भूल जाता हूँ सारी दुनिया,
मुझे तुम इतना याद आते हो।
हम तो गुम थे किसी की खामोशी में,
आपने याद दिलाया तो वक्त याद आया।
हमने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर,
दिल से गुजरी हैं सितारों की बारातें अक्सर,
और कौन है जो मुझको तसल्ली देता,
हाथ रख देती हैं दिल पर तेरी बातें अक्सर।
कोई हल न कोई जवाब है
ये सवाल कैसा सवाल है,
जिसे भूल जाने का हुक्म है
उसे भूल पाना मुहाल है।
दिल की खामोशी से साँसों के ठहर जाने तक,
याद आएगा मुझे वो शख्स मर जाने तक।
तुम आँखों की बात करते हो जनाब,
हमारे तो लफ्ज भीग गए किसी की याद में।
प्यार की इन राहों में
धोखा हमने खाया है,
पर क्या करें कमबख्त दिल
फिर उसकी यादों से भर आया है।
हिज्र की रात बहुत लम्बी है फ़राज़,
आओ उसकी याद में थक के सो जाएं।
Ahmad Faraz
इस जिंदगी में इतनी फ़रागत किसे नसीब,
इतना ना याद आ कि तुझे भूल जाएँ हम।
Ahmad Faraz
इक अजब हाल है कि अब उसको,
याद करना भी बेवफ़ाई है।
Jaun Elia
मैं रहा उम्र भर जुदा ख़ुद से,
याद मैं ख़ुद को उम्र भर आया।
Jaun Elia
कोई मजबूरी नहीं, दिल करे तो याद करना,
रिश्तों की भीड़ से फुरसत मिले तो याद करना,
है दुआ की हर खुशी हो नसीब तुझे,
फिर भी कभी आँख भर आए तो हमें याद करना।
दर्द-ए-दिल जब हद से गुजर जाता है,
बनकर स्याही कागज पे बिखर जाता है,
जब-जब उठा है तेरी यादों का धुआं,
बनकर नशा इस दिल में उतर जाता है।
रोज कहता हूँ कि भूल जाऊंगा उसे,
मगर न जाने क्यों रोज ये बात भूल जाता हूँ।
हर वक्त मेरी खोज में रहती है तेरी याद,
तू ने मेरे वजूद की तन्हाई भी छीन ली।
तेरी यादें ही मेरा सुकून है,
अब मैं अक्सर खुश रहता हूँ।
कोशिश करूंगा उसको भुलाने की उम्र भर,
आएगी उसकी याद मगर उमर भर मुझे।
Qateel Shifai
ये मोहब्बत भी है क्या रोग फ़राज़,
जिसे भूले वो सदा याद आया।
Ahmad Faraz
तुझे रात भर ऐसे याद करता हूँ मैं,
जैसे सुबह इम्तिहान हो मेरा।
एक उम्मीद का दीया जल रहा था,
जिसे अश्कों की बारिश ने बुझा दिया,
तनहा अकेले खुशी से जी रहा था,
आज फिर आपकी याद ने रुला दिया।
किसी की याद दिल में आज भी है,
भूल गए वो मगर प्यार आज भी है,
हम खुश रहने का दावा तो करते हैं मगर,
उनकी यादों में बहते आँसू आज भी हैं।
बस इस गुमान पे उसको भुला नहीं पाया,
मैं एक रोज उसे याद आने वाला हूँ।
उनकी याद, उनकी तमन्ना, उनका ग़म,
कट रही है जिन्दगी आराम से।
दिल में गूंजती तेरी आवाज याद आएगी,
तेरी कही हुई हर बात याद आएगी,
दिन गुजर जाएगा हर रात याद आएगी,
हर लम्हा वो पहली मुलाकात याद आएगी।
रात यूँ सांस रुक गयी मेरी,
तू मुझे भूल गया हो जैसे।
अब भी चले आते हैं ख्यालों में वो,
रोज़ लगती है हाज़िरी उस ग़ैर हाज़िर की।
मुझे आगोश में लेकर तेरे किस्से सुनती है
मेरी रात अक्सर मुझे सुलाना भूल जाती है।
ये मुमकिन है तुझसे न मिलूँ मैं बिछड़ने के बाद,
मेरी यादें तुझसे न जुदाई चाहे तो क्या करूँ।
मुद्दतें हो गईं बिछड़े हुए तुम से लेकिन,
आज तक दिल से मिरे याद तुम्हारी न गई।
Akhtar Shirani
भुला बैठे हो हम को आज लेकिन ये समझ लेना,
बहुत पछताओगे जिस वक़्त हम कल याद आएँगे।
Akhtar Shirani
याद आओ मुझे लिल्लाह न तुम याद करो,
मेरी और अपनी जवानी को न बर्बाद करो।
Akhtar Shirani
कुछ इस तरह से याद आते रहे हो,
कि अब भूल जाने को जी चाहता है।
Akhtar Shirani
आप रहते हो दूर कुछ पल के लिए,
दूर रहकर भी करीब हो हर पल के लिए,
कैसे याद न आये आपकी एक पल के लिए,
जब की दिल में हो आप हर पल के लिए।
जीने की कुछ तो वजह होनी चाहिए,
वादे ना सही.. यादें तो होनी चाहिए।
जिसको तुम पूछते हो वो मर गया फ़राज़,
उसको किसी की याद ने जिंदा जला दिया।
Ahmad Faraz
अब उसे रोज सोचो तो बदन टूटता है फ़राज़,
उम्र गुजरी है उसकी याद का नशा करते करते।
Ahmad Faraz
नहीं है कुछ भी मेरे दिल में सिवा उसके,
मैं उसे अगर भुला दूँ तो याद क्या रखूँ।
मैं बहुत ख़ुश था कड़ी धूप के सन्नाटे में,
क्यों तेरी याद का बादल मेरे सिर पर आया।
जागना भी कबूल है तेरी यादों में रात भर,
तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ।
बिछड़ी हुई राहों से जो गुजरे हम कभी,
हर मोड़ पर खोई हुई एक याद मिली है।
कोई शाम आती है आपकी याद लेकर,
कोई शाम जाती है आपकी याद देकर,
हमें तो इंतज़ार है उस हसीन शाम का,
जो आये कभी आपको अपने साथ लेकर।
काश उनको कभी फुर्सत में ये ख़याल आए,
कि कोई याद करता है उन्हें ज़िन्दगी समझकर।
इस तरह दिल में समाओगे सोचा न था,
दिल को इतना तड़पाओगे सोचा न था,
मालूम था कि दूर हो तो याद तो आओगे,
मगर इस कदर याद आओगे सोचा न था।
तेरी यादों की कोई मंजिल होती तो अच्छा था,
खबर तो रहती कितना सफ़र तय करना है।
किसने कह दिया आपकी याद नहीं आती,
बिना याद किये कोई रात नहीं जाती,
वक्त बदल जाता है, आदत नहीं जाती,
आप खास हो ये बात कही नहीं जाती।
आती है नींद आँखों से चली जाती है,
तेरी यादों से उसकी कुछ खास बनती नहीं है।
मैं अपनी चाहतों का हिस्सा जो लेने बैठ जाऊं,
तो सिर्फ मेरा याद करना भी ना लौटा सकोगे।
बहुत ही याद आता है मेरे दिल को तड़पता है,
वो तेरा पास न होना बहुत मुझको रुलाता है।
तुम्हारी याद के दीपक भी अब जलाना क्या,
जुदा हुए हैं तो अहद-ए-वफ़ा निभाना क्या।
तेरी बेरूखी का अंजाम एक दिन यही होगा,
आखिर भुला ही देंगे तुझे याद करते करते।
जिन की यादों से रोशन हैं मेरी आँखें,
दिल कहता है उन को भी मैं याद आता हूँ।
दुनिया भर की यादें हम से मिलने आती हैं,
शाम ढलते ही मेरे घर में मेला लगता है।
निकल जाते हैं तब आँसू
जब उनकी याद आती है,
जमाना मुस्कुराता है
मोहब्बत रूठ जाती है।
अगर आँसू बहा लेने से यादें बह जाती,
तो एक ही दिन में हम तेरी याद मिटा देते।
ख्याल में आता है जब भी उनका चेहरा,
तो लबों पे अक्सर एक फरियाद आती है,
भूल जाते हैं सारे दर्द-ओ-सितम उनके,
जब उनकी थोड़ी सी मोहब्बत याद आती है।
तेरी याद किसी मुफलिस के खजाने कि तरह है,
जिसे हम साथ रखते हैं, जिसे हम रोज गिनते हैं।
आज इस उजड़े हुए शहर में मोहसिन हमको,
अपने बिछड़े हुए यार की बहुत याद आयी।
Mohsin Naqvi
जो नफस तेरी याद में गुजरे,
वह बंदगी में शुमार होता है।
Abdul Hamid Adam
बस जीने ही तो नहीं देगी,
और क्या कर लेगी याद तेरी।
जाने कैसे जीते हैं लोग यादों के सहारे,
मैं तो कई बार मरता हूँ एक याद आने पे।